“जिन जातकों का ना ‘टी’ अक्षर से होता है वह ऊर्जावान, शक्ति का भंडार होते हैं तथा अपने आप में इन्हें पूर्ण विश्वास होता है। यह संतोषी व दृढ़ संकल्पी होते हैं तथा तरह—तरह की योजनाओं में खोए रहते हैं।

इस अक्षर वाले व्यक्ति अपनी खुशी और गम जल्दी किसी को नहीं बताते हैं लेकिन हां दूसरो को हमेशा खुश और उनके दुख दूर करने की कोशिश करते है।

यह अपने अच्छे कार्यो एवं सुख के दिनों में सबको भागीदार बनाते हैं परन्तु अपने गम व कष्ट अकेले ही सहते हैं। इनकी कल्पनाशक्ति, प्रबन्ध शक्ति, एवं कार्य करने की प्रणाली गजब की होती है।

इन्हें भगवान में खास विश्वास होता है इसलिए यह प्रकृति हो या देश सभी के प्रति अपना अगाध प्रेम प्रकट करते हैं। ऐसे जातक निष्काम कर्मयोगी और ईमानदार होते हैं तथा एक अच्छा सुखपूर्ण जीवन जीते हैं।

लोग इनके इस गुण के कारण इन्हें काफी पसंद करते हैं। इन्हें खुद पर काफी भरोसा होता है। अपने दम पर ये बड़ी से बड़ी मुश्किलों को भी सुलझा लेते हैं।

अपनी मेहनत के बल पर ये दुनिया जीतने का भी रिस्क रखते हैं। टी अक्षर वाले पैसा और शोहरत तो बहुत कमाते हैं लेकिन प्रेम के नाम पर इनका सिक्का नहीं चलता है।

यह स्वतन्त्र एवं त्वरित निर्णय वाले होते हैं। कोई कुछ भी कहे, सुनते सबकी हैं परन्तु करते वहीं हैं जो ये चाहते हैं, ये आत्मविश्वासी होते हैं। अपनी उन्नति के लिए ये सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। किसी गलत तरीके से उन्नति लाभ करना इन्हें पसन्द नहीं होता।

यह छोटे से छोटा काम करने में भी नहीं हिचकते। यह स्वतन्त्रता—प्रय होते हैं। यह समाज में अपनी पहचान अलग से बनाते हैं। ऐसे जातक न्यायप्रिय होते हैं एवं दिव्य शक्ति से ओत—प्रोत होते हैं। ऐसे जातक बहुआयमी व्यक्तित्व के धनी होते हैं तथा चहुंमुखी विकास करते हैं। इनका विश्वास काम करते रहने में है, फल की चिता यह कम करते हैं। शत्रु के रूप में खतरनाक एवं मित्र के रूप में परमहितैषी होते हैं।

ये प्रेम और सेक्स के प्रति इनकी सोच नकारात्मक होती है| वैसे ये रिश्तों और भावनाओं के प्रति काफी केयरिंग होते हैं लेकिन इन में अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता नहीं होती है।”