“जिन जातकों का नाम का ‘एस’ अक्षर से शुरू होता है वह बहुत ही मिलनसार, बहिर्मुखी, हंसमुख, विलक्षण एवं विभिन्न प्रतिभाओं के धनी होते हैं। इनके मिलने—जुलने वालों का दायरा बहुत बड़ा होता है। यह तीव्र बुद्धि वाले तथा समझदार होते हैं। यह प्यार और नफरत दोनों ही बड़ी संजीदगी से निभाते हैं। इन्हें निर्णय लेने में वक्त लगता है।

यह बहुत ही वफादार, और सुलझे हुए व्यक्ति होते हैं। आत्मिंचतन, अभ्यास, शोध, लेखन तथा रहस्यमयी जीवन को जीना आदि इन्हें अच्छा लगता है। यह हर तरह के सामूहिक कार्यों में बढ़—चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

पैसा,रूतबा हासिल करने वाले ये लोग अपनी चीज आसानी से किसी को कुछ नही देते है।

ये हंसमुख, विनोदी प्रकृति के होते हैं। ये अपनी जिम्मेदारी के प्रति निष्ठावान होते हैं। अपने उच्च पदाधिकारी और मालिक के प्रतिपूर्ण रूप से वफादार होते हैं। खुद कष्ट सहकर अन्यों को सुख देना इन्हें अच्छा लगता है।

लोकप्रियता पाने का लोभ ये छोड़ नहीं सकते। ज्यादा से ज्यादा जन—सम्पर्व बनाए रखने का प्रयत्न करते हैं। धन र्अिजत करने की अपेक्षा ये विद्या ज्ञान, एवं अनुभव र्अिजत करना अधिक पसन्द करते हैं।

कुल मिलकर कहा जा सकता है कि ये कंजूस होते है, एस अक्षर वाले दिल के बुरे नहीं होते लेकिन उनका तेज स्वभाव उन्हें बुरा बना देता है।

ये व्यक्ति अपनी मेहनत के बल पर ये सब कुछ पा ही लेते है। एस अक्षर वाले अपने प्यार के प्रति सचेत रहने वाले होते हैं, ये लोग कुछ शक्की मिजाज के भी होते हैं, इसके पीछे इनकी भावना सिर्फ इतनी होती है कि वो अपने प्रेम को किसी से शेयर नहीं करते हैं

लेकिन उनका ये ही तरीका दूसरे लोगों के लिए सिरदर्द का कारण बन जाते हैं। इनकी सेक्स के प्रति भी कोई दिलचस्पी नहीं होती है|

यह अक्षर वैराग्य का भी प्रतीक है। ऐसे जातक का व्यक्तित्व खुला हुआ होता है तथा ये पक्ष विपक्ष दोनों बात धैर्य पूर्वक सुनते हैं। तथा प्राय: हंसमुख व मिलनसार होते हैं। सामूहिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में बड़े उत्साह के साथ बढ़—चढ़कर भाग लेते हैं। ऐसे व्यक्ति को पूर्वाभास शीघ्र होता है। ऐसे व्यक्ति सत्य के लिए, अपने सिद्धान्तों की रक्षा हेतु जान पर भी खेल जाते हैं। इनको किताबी ज्ञान के अलावा अनुभवों का ज्ञान अधिक होता है।

यह अपने क्षेत्र के स्वयंभू नेता होते हैं। इनका पारिवारिक जीवन प्राय: कलहपूर्ण होता है।”