“जिन जातकों का नाम ‘एल’ अक्षर से होता है वह उच्च विचारों वाले, व्यवस्थित एवं अनुशासन प्रिय होते हैं तथा हर कार्य योजना के तहत करते हैं। यह दार्शनिक विचारधारा वाले गंभीर प्रवृत्ति के होते हैं। अपनी महत्त्वकांक्षा एवं स्वाभिमान के प्रति बड़े सतर्व रहते हैं।

इन्हें जीवन में रुकना या पीछे मुड़ना पसंद नहीं होता। इनका गूढ़विद्या एवं अध्यात्म आदि में विशेष रुझान होता है। इनके व्यक्तित्व एवं व्यवहार में विशेष प्रकार की शालीनता होती है। ऐसे जातक धुन के पक्के व कई विशेष उपलब्धियाँ लिए होते हैं।

हर चीज दिल से सोचने वाले होते हैं एल अक्षर वाले| इन्हें गुस्सा भी बहुत जल्दी आता है, लेकिन इनके गुस्से पर भोलेनाथ की कृपा रहती है इसलिए इनका गुस्सा जल्द ही काफूर हो जाता है।

इस अक्षर वाले लोगों की एक खासियत होती है वो है इस अक्षर का व्यक्ति कभी किसी बड़ी चीज की तमन्ना नहीं रखता हैं। इन्हें छोटी-छोटी ही चीजों में खुशी मिलती है।

यह दार्शनिक, भावुक एवं दयालु होते हैं। ये श्रेष्ठ विचारक एवं न्यायी होते हैं। इनका लक्ष्य मात्र उन्नति करना, आगे बढ़ना होता है। इनके विचार सुलझे हुए होते हैं। प्रत्येक कार्य योजनाबद्ध करते हैं। ऐसे व्यक्ति रिजर्व नेचर के होते हैं। विद्वानों एवं श्रेष्ठ जनों की संगति पसंद करते हैं। ऐसे जातक भावुक, परोपकारी एवं दार्शनिक मनोवृत्ति वाले होते हैं।

ऐसे व्यक्ति विद्याध्ययन में विशेष रूचि रखते हैं। संघर्षशील प्रवृत्ति इनके जीवन की निजी विशेषता कही जा सकती है। ऐसे लोग वाद—विवाद एवं बौद्धिक स्पर्धा में सदैव बढ़—चढ़कर भाग लेते हैं। यदि यह व्यक्तिगत राग—द्बेष से लिप्त न हो तो ये बहुत बड़े लेखक, दार्शनिक व समाज चितक साबित हो सकते हैं। ऐसे व्यक्ति स्वाभिमानी होते हैं। इनको क्रोध शीघ्र आता है। जल्दी बोलना, अकाट्य तर्व प्रस्तुत करना, अपनी लेखनी या वाणी से दूसरों को वशीभूत करना इनकी निजी विशेषता कही जा सकती है।

इन्हें जीवन में बहुत कुछ पाने की ख्वाहिश नहीं होती। इस तरह के लोग सभी के साथ प्यार से रहते हैं, लेकिन परिवार की अहमियत इनके लिए सबसे ज्यादा होती है।

कभी-कभी इनके सामने आर्थिक समस्याएं जरूर आती हैं, लेकिन हर समस्या से निपटने के लिए इन्हें रास्ता मिल जाता है।
प्यार के मामले में यह लोग काफी संजीदा होते हैं, साथ ही बेहद रोमां‍टिक भी। प्रेम के लि‍ए इनकी सोच काफी आदर्शवादी होती है, और ख्वाबों की दुनिया को अपने साथी से दूर ही रखना पसंद करते हैं।

इनकी आजीविका का साधन अध्ययन—अध्यापन, लेखन—प्रकाशन, अन्वेषण, अनुसंधान, शोध—कार्य, राजनीति व र्धामक सामाजिक क्रिया—कलापों के इर्द—गर्द होता है। रुपयों—पैसों का इनके जीवन में खास महत्त्व नहीं होता, ये सैद्धान्तिक जीवन जीना पसन्द करते हैं। ये नैतिक मूल्यों पर आधारित आदर्श जीवन जीना चाहते हैं तथा चरित्र की उज्ज्वलता पर विशेष ध्यान देते हैं।

ये बहुत कल्पनाशील होते हैं। इसलिए ये लोग अक्सर साहित्य के क्षेत्र में अपना करियर बनाते हैं।”