“जिन जातकों का नाम ‘जी’ अक्षर से शुरू होता है वह बहुत ही संयम और आत्मविश्वास से भरे होते हैं।

शांत प्रिय होते है जी अक्षर वाले लेकिन जब इन्हें गुस्सा आता है तो अगले की खैर नहीं होती है।

सात्विक्ता, सत्यता एवं दूरर्दिशता इनके विशेष गुण होते हैं। इनके व्यक्तित्व में गजब का आकर्षण होता है खासकर इनकी वाणी और वार्तालाप का ढंग लोगों को न केवल आर्किषत करता है बल्कि लोग इनके बताए मार्गों एवं सिद्धान्तों का पालन भी करते हैं।

ह किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले उसकी पूर्ण योजना बनाते हैं फिर काम को अंजाम देते हैं। यह उसूलों, कत्र्तव्यों एवं जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देते हैं।

इस अक्षर वाले व्यक्ति गलतियों को दोहराते नहीं हैं बल्कि उससे सबक लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं और खासा सफल भी होते है। ये तब तक किसी को परेशान नहीं करते हैं जब तक कोई इन्हें तंग नहीं करता है।

फिलहाल इनमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा होता है। इस अक्षर वाले व्यक्ति कम बोलने वाले और प्यार पर ज्यादा भरोसा न करने वाले होते हैं|

अपनी मेहनत पर भरोसा करने वाले ये व्यक्ति जीवन को एक संघर्ष मानकर चलते हैं इसलिए इन्हें अपनी परेशानियों से ज्यादा दिक्कत नहीं होती है।

इनके व्यक्तित्व में कुछ ऐसी विशेषता होती है कि लोग इनकी तरफ खिचे चले आते हैं। शत्रु भी शत्रुता भूल जाता है और मित्रता करने को आतुर दिखाई देता है। ये आडम्बरों को परे रखकर जीवनयापन करते हैं। सादगी, शिष्टता के पुजारी, नवीन सभ्यता के जन्मदाता कहे जाते हैं। हर कार्य योजनाबद्ध करने का इनका स्वभाव होता है।

लड़ाई, तर्व, वाद—विवाद में इनकी रूचि बिल्कुल नहीं होती।

इस अक्षर वाले व्यक्तियों को ईश्वर पर काफी भरोसा होता है, इसलिए ये हमेशा धर्म-कर्म के काम करते रहते हैं। इनका वैवाहिक जीवन हमेश सुखी रहता है।

इन्हें हर वो चीज मिलती है जिसकी इन्हें चाहत होती है लेकिन हर चीज में इन्हें वक्त लगता है। “